Nitnem Teeka (Nitnem ki Vaaniyon ki Vyakhya) - Amrit-Myi Vaaniyon Ka Guldasta

Nitnem Teeka (Nitnem ki Vaaniyon ki Vyakhya) - Amrit-Myi Vaaniyon Ka Guldasta

Sunn Galaa Aakaas Kee
बाबा जिसु तू देहि सोई जनु पावै ॥
(बाबा जिस तू देह सोई जन पावै ॥) हि.उ.

अर्थ:- हे प्रभु! जिस सेवक के हृदय से अपनी मैं (अहम) को छुड़वा कर, तू (आत्मा का स्वरूप) दे देता हैं, (भाव- जिस गुरूमुख को परमात्मा अपने स्वरूप की झलक दिखला कर अहम को समाप्त कर देता है) इस अमूल्य वस्तु को वही सेवक प्राप्त कर सकता है।

पावै त सो जनु देहि जिस नो होरि किआ करहि वेचारिआ ॥
इकि भरमि भूले फिरहि दह दिसि इकि नामि लागि सवारिआ ॥
(पावै त सो जन देह जिस नो होर किआ करह वेचारआ ॥
इक भरम भूले फिरह दह दिस इक नाम लाग सवारआ ।) हि.उ.

अर्थ:- जिसको वह प्रभु कृपा करके, इस प्रकार का शरीर देता है, जिस शरीर में से परमात्मा का अनुभव हो जाए, उसको धारण करके उसका सेवक हो जाता है। और शेष मनुष्य, विचारों में घिरे हुए क्या कर सकते हैं? उन्हीं विचारों की ऊब डूब में भूले हुए, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो परमात्मा से स्वयं को दूर एवं अलग समझ कर, इस भ्रम में भूले हुए, इधर-उधर दस दिशाओं में भटकते रहते हैं। कुछ ऐसे भी गुरूमुख प्रिय हैं जिन्होंने निर्गुण नाम के साथ मिलकर अपने जन्म को सफ़ल बना लिया।

  • Website:

    EternalPathbooks.com
  • Publishing Year:

    Coming Soon
  • Language:

    Hindi
  • Publisher:

    Eternal Path Publications Society (Regd.)

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